अभयारिष्ट का परिचय (Introduction of Abhayarishta)
अभयारिष्ट क्या है? (What is Abhayarishta?)
अभयारिष्ट एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से पाचन तंत्र के विकारों के लिए उपयोग की जाती है। यह एक हर्बल अरिष्ट (fermented preparation) है जिसका नाम इसके मुख्य घटक हरीतकी (अभया) के नाम पर रखा गया है। अभयारिष्ट का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है और यह सदियों से पाचन संबंधी समस्याओं के उपचार में प्रयोग किया जाता रहा है।
यह औषधि विशेष रूप से कब्ज, बवासीर, अपच, पेट फूलना और अन्य पेट संबंधी विकारों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। अभयारिष्ट एक तरल औषधि है जो स्वाद में हल्की मीठी और कसैली होती है। इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होता है।
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अभयारिष्ट का मुख्य कार्य पाचन अग्नि को बढ़ाना और मल को नरम करके आसानी से निकालना है। यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बनी होती है और इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। भारत में लगभग सभी आयुर्वेदिक कंपनियां इसका निर्माण करती हैं और यह आसानी से उपलब्ध होती है।
अभयारिष्ट की संरचना (Composition of Abhayarishta)
अभयारिष्ट में निम्नलिखित प्रमुख औषधीय द्रव्य होते हैं:
- हरीतकी (Haritaki) – मुख्य घटक
- धातकी पुष्प (Dhataki flowers)
- महुआ के फूल (Mahua flowers)
- गुड़ या शक्कर (Jaggery or Sugar)
- मुनक्का (Raisins)
- गोखरू (Gokshura)
- त्रिवृत (Trivrit)
- विडंग (Vidanga)
- धनिया (Coriander)
- द्राक्षा (Grapes)
ये सभी घटक विशेष विधि से मिलाकर और किण्वन (fermentation) प्रक्रिया के माध्यम से अभयारिष्ट तैयार किया जाता है।
अभयारिष्ट के सामान्य नाम (Common names of Abhayarishta)
| नाम | भाषा |
| अभयारिष्ट | संस्कृत (Sanskrit) |
| अभयारिष्ट | हिंदी (Hindi) |
| Abhayarishta, Abhayarishtam | अंग्रेजी (English) |
| अभयारिष्ट | मराठी (Marathi) |
| અભયારિષ્ટ | गुजराती (Gujarati) |
| அபயாரிஷ்டம் | तमिल (Tamil) |
| అభయారిష్టం | तेलुगु (Telugu) |
| ಅಭಯಾರಿಷ್ಟ | कन्नड़ (Kannada) |
| അഭയാരിഷ്ടം | मलयालम (Malayalam) |
अभयारिष्ट के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Abhayarishta)
| गुणधर्म | विवरण |
| दोष (Dosha) | त्रिदोष शामक (विशेषकर वात-कफ शामक) |
| रस (Taste) | मधुर (Sweet), कषाय (Astringent), तिक्त (Bitter) |
| गुण (Qualities) | लघु (Light), रूक्ष (Dry) |
| वीर्य (Potency) | उष्ण (Hot) |
| विपाक (Post Digestion Effect) | मधुर (Sweet) |
| प्रभाव (Effect) | दीपन (Appetizer), पाचन (Digestive), रेचन (Laxative), अनुलोमन (Carminative) |
अभयारिष्ट के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Abhayarishta)
कब्ज में अभयारिष्ट (Abhayarishta for constipation)
कब्ज की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है। अभयारिष्ट कब्ज के लिए एक उत्तम औषधि है। इसके नियमित सेवन से मल नरम होता है और आसानी से निकल जाता है। यह आंतों को साफ करता है और पेट की सफाई में मदद करता है। अभयारिष्ट का सेवन रात में सोने से पहले करने से सुबह पेट अच्छे से साफ होता है।
पाचन में (Abhayarishta for digestion)
अभयारिष्ट पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और पाचन अग्नि को बढ़ाता है। इसके सेवन से खाना अच्छे से पचता है और पोषक तत्व शरीर में अच्छे से अवशोषित होते हैं। यह जठराग्नि (digestive fire) को प्रदीप्त करता है और पाचन क्रिया को सुचारू बनाता है।
बवासीर में अभयारिष्ट (Abhayarishta for piles)
बवासीर या अर्श रोग में अभयारिष्ट बहुत ही लाभदायक होता है। यह मल को नरम करके मस्सों पर दबाव कम करता है और रक्तस्राव को रोकने में सहायक होता है। नियमित सेवन से बवासीर में होने वाले दर्द और जलन में राहत मिलती है। इसे घी या शहद के साथ लेने से और भी अधिक लाभ होता है।
अपच में (Abhayarishta for indigestion)
अपच की समस्या में अभयारिष्ट बहुत प्रभावी है। यह पेट में बनने वाली गैस को दूर करता है और भोजन को पचाने में मदद करता है। इसके सेवन से पेट में भारीपन, खट्टी डकारें और मतली जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
पेट दर्द में (Abhayarishta for abdominal pain)
पेट दर्द, मरोड़ और ऐंठन में अभयारिष्ट का सेवन लाभकारी होता है। यह वात दोष को शांत करता है और पेट की मांसपेशियों को आराम देता है। गैस या कब्ज के कारण होने वाले पेट दर्द में यह विशेष रूप से फायदेमंद है।
आंतों के रोग में (Abhayarishta for intestinal disorders)
अभयारिष्ट आंतों को साफ और स्वस्थ रखता है। यह आंतों में जमे हुए मल को निकालता है और आंतों की सूजन को कम करता है। इसके नियमित सेवन से आंतें मजबूत होती हैं और उनकी कार्यप्रणाली में सुधार होता है।
भूख में (Abhayarishta for appetite)
अभयारिष्ट भूख को बढ़ाने में मदद करता है। यह पाचन अग्नि को तेज करता है जिससे भूख ठीक से लगती है। भूख न लगने की समस्या में इसका सेवन करने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।
गैस में (Abhayarishta for gas)
पेट में गैस बनना, पेट फूलना और गैस के कारण होने वाली परेशानियों में अभयारिष्ट लाभदायक है। यह पेट में बनी गैस को बाहर निकालता है। इसके सेवन से पेट हल्का महसूस होता है।
लीवर में (Abhayarishta for liver)
अभयारिष्ट लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और लीवर में जमे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होता है। यह पीलिया और अन्य लीवर विकारों में भी फायदेमंद है।
प्लीहा विकार में (Abhayarishta for spleen disorders)
तिल्ली (प्लीहा) के बढ़ने या अन्य विकारों में अभयारिष्ट का सेवन लाभकारी होता है। यह प्लीहा के आकार को नियंत्रित करता है और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।
अर्श में (Abhayarishta for hemorrhoids)
अर्श या बवासीर में अभयारिष्ट रामबाण की तरह काम करता है। यह खूनी और बादी दोनों प्रकार के बवासीर में लाभकारी है। इसके नियमित सेवन से मस्से सूख जाते हैं और दर्द में राहत मिलती है।
मूत्र रोग में (Abhayarishta for urinary disorders)
अभयारिष्ट में मौजूद गोखरू और अन्य घटक मूत्र मार्ग के संक्रमण और अन्य मूत्र विकारों में लाभदायक होते हैं। यह मूत्र की जलन को कम करता है और मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखता है।
वात रोग में (Abhayarishta for vata disorders)
वात दोष के कारण होने वाले रोगों जैसे जोड़ों का दर्द, गैस, कब्ज आदि में अभयारिष्ट लाभकारी है। यह वात को संतुलित करता है और शरीर में हल्कापन लाता है।
कृमि रोग में (Abhayarishta for worm infestation)
अभयारिष्ट में विडंग जैसे कृमिघ्न (anti-parasitic) गुण वाले द्रव्य होते हैं जो पेट के कीड़ों को मारने में सहायक होते हैं। बच्चों और वयस्कों दोनों में पेट के कीड़ों की समस्या में यह उपयोगी है।
त्वचा रोग में (Abhayarishta for skin diseases)
अभयारिष्ट शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर त्वचा को स्वस्थ बनाता है। कब्ज के कारण होने वाले त्वचा रोग, मुंहासे और अन्य त्वचा समस्याओं में यह लाभदायक है।
रक्त शुद्धि में (Abhayarishta for blood purification)
अभयारिष्ट रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है। यह रक्त में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है। स्वच्छ रक्त से शरीर के सभी अंग बेहतर तरीके से काम करते हैं।
कमजोरी में (Abhayarishta for weakness)
अभयारिष्ट शरीर को शक्ति प्रदान करता है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर यह भोजन से पोषण का बेहतर अवशोषण करवाता है जिससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है। यह सामान्य दुर्बलता और थकान में भी लाभकारी है।
वजन में (Abhayarishta for weight management)
अभयारिष्ट पाचन तंत्र को सुधारकर और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर वजन प्रबंधन में मदद करता है। यह मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाता है और शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक होता है।
मुख्य घटक (Key Ingredients)
अभयारिष्ट के प्रमुख घटकों के लाभ:
हरीतकी (Haritaki) – यह मुख्य घटक है जो कब्ज दूर करता है, पाचन सुधारता है और त्रिदोष को संतुलित करता है।
धातकी (Dhataki) – यह किण्वन में सहायक होता है और औषधि को प्रभावी बनाता है।
त्रिवृत (Trivrit) – यह एक प्राकृतिक रेचक है जो मल को नरम करता है।
विडंग (Vidanga) – यह कृमिनाशक है और पेट के कीड़ों को मारता है।
गोखरू (Gokshura) – यह मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखता है।
सेवन मात्रा (Dosages of Abhayarishta)
वयस्कों के लिए:
- मात्रा: 15-30 मिली (3-6 चम्मच)
- दिन में दो बार (सुबह और रात)
- भोजन के बाद
बच्चों के लिए (5-12 वर्ष):
- मात्रा: 5-10 मिली (1-2 चम्मच)
- दिन में दो बार
- भोजन के बाद
किशोरों के लिए (12-18 वर्ष):
- मात्रा: 10-15 मिली (2-3 चम्मच)
- दिन में दो बार
- भोजन के बाद
सेवन विधि (Method of consumption)
अभयारिष्ट को बराबर मात्रा में गुनगुने पानी के साथ मिलाकर लेना चाहिए। इसे भोजन के तुरंत बाद लेना सबसे अच्छा होता है। रात में सोने से पहले लेने पर सुबह पेट अच्छे से साफ होता है। इसे खाली पेट नहीं लेना चाहिए।
उदाहरण: यदि आप 15 मिली अभयारिष्ट ले रहे हैं तो इसे 15 मिली गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिएं।
सावधानियां (Precautions of Abhayarishta)
अभयारिष्ट का सेवन करते समय निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए:
- गर्भवती महिलाओं को बिना चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
- स्तनपान कराने वाली माताओं को सावधानी से लेना चाहिए।
- मधुमेह के रोगियों को इसमें शक्कर होने के कारण सावधानी से लेना चाहिए।
- दस्त या अतिसार की स्थिति में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
- बताई गई मात्रा से अधिक सेवन न करें, अन्यथा पेट में दर्द या दस्त हो सकते हैं।
- इसमें अल्कोहल (5-10%) होता है, इसलिए वाहन चलाने से पहले या मशीनरी संचालन से पहले सावधानी बरतें।
- बच्चों को यह दवा चिकित्सक की देखरेख में ही दें।
- अगर किसी घटक से एलर्जी हो तो इसका सेवन न करें।
- इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधी धूप से बचाएं।
- बोतल खोलने के बाद 6 महीने के अंदर उपयोग करें।
- हमेशा आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेकर ही इसका सेवन शुरू करें।
नोट: यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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