अभ्रक भस्म क्या है? (What is Abhrak Bhasma?)
अभ्रक भस्म आयुर्वेद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली औषधि है जो खनिज पदार्थों से बनाई जाती है। यह भारतीय चिकित्सा पद्धति में सदियों से उपयोग की जाने वाली एक रसायन औषधि है। अभ्रक एक प्राकृतिक खनिज है जिसे विशेष आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं द्वारा शुद्ध करके और भस्म बनाकर औषधीय उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
अभ्रक भस्म को रसायनों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और इसे आयुर्वेद में दिव्य औषधि का दर्जा प्राप्त है। यह शरीर की सभी धातुओं को पुष्ट करती है और त्रिदोष को संतुलित करने में सक्षम है। अभ्रक भस्म विशेष रूप से श्वास रोग, हृदय रोग, क्षय रोग, मधुमेह और कमजोरी जैसे गंभीर रोगों में अत्यंत प्रभावी है।
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यह औषधि शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और शारीरिक व मानसिक बल प्रदान करती है। अभ्रक भस्म का सेवन करने से व्यक्ति दीर्घायु प्राप्त करता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह विशेष रूप से फेफड़ों और हृदय के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
अभ्रक का बाह्यस्वरूप (Morphology of Abhrak)
अभ्रक एक चमकदार खनिज पदार्थ है जो परतों के रूप में पाया जाता है। यह सफेद, काला, लाल, पीला या हरे रंग का हो सकता है। अभ्रक की पतली परतें पारदर्शी या अर्धपारदर्शी होती हैं और इन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है। यह छूने में चिकना और मुलायम होता है। अभ्रक प्राकृतिक रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानों में पाया जाता है।
शुद्ध अभ्रक लचीला होता है और इसकी परतें बहुत पतली होती हैं। इसमें धातु जैसी चमक होती है और यह ताप और बिजली का कुचालक होता है। भस्म बनाने के बाद यह बहुत महीन पाउडर के रूप में होता है जो रंग में हल्का धूसर या सफेद होता है।
अभ्रक के सामान्य नाम (Common names of Abhrak)
| भाषा | नाम |
| वानस्पतिक नाम (Botanical Name) | Biotite / Muscovite (Mineral) |
| संस्कृत (Sanskrit) | अभ्रक, अब्ध्र, व्योमाश्म, गिरिजा, सितल |
| हिंदी (Hindi) | अभ्रक, अबरक |
| अंग्रेजी (English) | Mica, Isinglass |
| बंगाली (Bengali) | अभ्रक |
| मराठी (Marathi) | अभ्रक, अबरक |
| गुजराती (Gujarati) | અભ્રક (Abhrak) |
| तमिल (Tamil) | அப்ரகம் (Apragam) |
| तेलुगु (Telugu) | అభ్రకము (Abhrakamu) |
| कन्नड़ (Kannada) | ಅಭ್ರಕ (Abhraka) |
| मलयालम (Malayalam) | അഭ്രകം (Abhrakam) |
| उर्दू (Urdu) | ابرک (Abrak) |
| फारसी (Persian) | ابرق (Abriq) |
| अरबी (Arabic) | تلق (Talq) |
अभ्रक के प्रकार (Types of Abhrak)
आयुर्वेद में अभ्रक के मुख्यतः चार प्रकार बताए गए हैं:
1. पीताभ्रक (Yellow Mica) – पीले रंग का, स्वर्ण की तरह चमकदार
2. रजताभ्रक (Silver Mica) – सफेद या चांदी के रंग का, सबसे अधिक उपयोगी
3. कृष्णाभ्रक (Black Mica) – काले रंग का
4. रक्ताभ्रक (Red Mica) – लाल रंग का
इनमें से रजताभ्रक को औषधीय उपयोग के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
अभ्रक भस्म के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Abhrak Bhasma)
| गुणधर्म | विवरण |
| दोष (Dosha) | त्रिदोष शामक (विशेषकर वात-कफ शामक) |
| रस (Taste) | मधुर (Sweet), कषाय (Astringent) |
| गुण (Qualities) | लघु (Light), स्निग्ध (Unctuous), सूक्ष्म (Subtle) |
| वीर्य (Potency) | शीत (Cold) |
| विपाक (Post Digestion Effect) | मधुर (Sweet) |
| प्रभाव (Effect) | रसायन (Rejuvenative), बल्य (Strengthening), वृष्य (Aphrodisiac), कासहर (Anti-tussive), श्वासहर (Anti-asthmatic) |
| अन्य (Others) | दीपन (Appetizer), मेधाकर (Intellect promoting), आयुष्यकर (Life promoting) |
अभ्रक भस्म के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Abhrak Bhasma)
श्वास रोग में अभ्रक भस्म (Abhrak Bhasma for respiratory diseases)
अभ्रक भस्म श्वास रोगों के लिए सर्वोत्तम औषधि मानी जाती है। यह दमा, सांस फूलना और अन्य श्वसन विकारों में अत्यंत प्रभावी है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाती है और श्वास नलियों की सूजन को कम करती है। अभ्रक भस्म का नियमित सेवन करने से सांस लेने में होने वाली कठिनाई दूर होती है और फेफड़े मजबूत होते हैं।
खांसी में (Abhrak Bhasma for cough)
पुरानी खांसी, सूखी खांसी और कफ वाली खांसी में अभ्रक भस्म बहुत लाभकारी है। यह कफ को पतला करके बाहर निकालने में मदद करती है और खांसी की तीव्रता को कम करती है। शहद के साथ लेने पर यह खांसी में विशेष रूप से प्रभावी होती है।
क्षय रोग में (Abhrak Bhasma for tuberculosis)
टीबी या क्षय रोग में अभ्रक भस्म एक महत्वपूर्ण औषधि है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और फेफड़ों में हुई क्षति को ठीक करने में मदद करती है। यह क्षय रोग के लक्षणों जैसे खांसी, बुखार, कमजोरी और वजन घटने में राहत देती है। अन्य औषधियों के साथ मिलाकर दी जाने पर यह क्षय रोग के उपचार में बहुत प्रभावी होती है।
हृदय रोग में (Abhrak Bhasma for heart diseases)
अभ्रक भस्म हृदय के लिए रसायन का काम करती है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। हृदय की धड़कन का तेज होना, हृदय की कमजोरी और अन्य हृदय विकारों में यह लाभकारी है। यह रक्त संचार को सुचारू बनाती है और हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में मदद करती है।
रक्त विकार में (Abhrak Bhasma for blood disorders)
अभ्रक भस्म रक्त को शुद्ध करती है और रक्त की गुणवत्ता में सुधार लाती है। यह खून की कमी को दूर करती है और हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाती है। एनीमिया और अन्य रक्त विकारों में यह बहुत उपयोगी है।
रक्तपित्त में (Abhrak Bhasma for bleeding disorders)
रक्तपित्त यानी शरीर के विभिन्न भागों से होने वाले रक्तस्राव में अभ्रक भस्म प्रभावी है। यह नाक से खून बहना, मुंह से खून आना, मूत्र में खून आना जैसी समस्याओं में लाभदायक है। यह रक्त वाहिकाओं को मजबूत बनाती है और अनावश्यक रक्तस्राव को रोकती है।
अनिद्रा में (Abhrak Bhasma for insomnia)
अनिद्रा या नींद न आने की समस्या में अभ्रक भस्म सहायक होती है। यह मन को शांत करती है और अच्छी नींद लाने में मदद करती है। तनाव और चिंता के कारण होने वाली अनिद्रा में यह विशेष रूप से लाभकारी है।
बुखार में (Abhrak Bhasma for fever)
पुराना बुखार, आवर्तक बुखार और टीबी के बुखार में अभ्रक भस्म उपयोगी है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है और बुखार के कारण होने वाली कमजोरी को दूर करती है।
मधुमेह में (Abhrak Bhasma for diabetes)
मधुमेह या प्रमेह रोग में अभ्रक भस्म का सेवन लाभकारी है। यह रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होती है और अग्न्याशय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। मधुमेह के कारण होने वाली कमजोरी और अन्य समस्याओं में भी यह राहत देती है।
मूत्र रोग में (Abhrak Bhasma for urinary disorders)
मूत्र मार्ग की सूजन, पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना जैसी समस्याओं में अभ्रक भस्म लाभदायक है। यह मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखती है और मूत्राशय को मजबूत बनाती है।
प्रमेह में (Abhrak Bhasma for urogenital disorders)
प्रमेह रोग यानी जननांग संबंधी विकारों में अभ्रक भस्म अत्यंत प्रभावी है। यह धातु क्षय को रोकती है और जननांग प्रणाली को मजबूत बनाती है। स्वप्नदोष, शीघ्रपतन और अन्य यौन समस्याओं में भी यह लाभकारी है।
बांझपन में (Abhrak Bhasma for infertility)
पुरुष और महिला दोनों में बांझपन की समस्या में अभ्रक भस्म का सेवन लाभदायक हो सकता है। यह प्रजनन क्षमता को बढ़ाती है और शुक्राणु एवं डिंब की गुणवत्ता में सुधार लाती है। यह शरीर की सभी धातुओं को पुष्ट करती है जिससे प्रजनन स्वास्थ्य बेहतर होता है।
शुक्राणु में (Abhrak Bhasma for sperm count)
पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी, शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी और नपुंसकता में अभ्रक भस्म अत्यंत लाभकारी है। यह वीर्य को गाढ़ा करती है, शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाती है और पुरुष प्रजनन क्षमता में सुधार लाती है।
बल वृद्धि में (Abhrak Bhasma for strength)
अभ्रक भस्म शरीर में बल और ऊर्जा का संचार करती है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और शारीरिक सहनशक्ति को बढ़ाती है। नियमित सेवन से शरीर में स्फूर्ति आती है और थकान दूर होती है।
कमजोरी में (Abhrak Bhasma for weakness)
लंबी बीमारी के बाद की कमजोरी, सामान्य दुर्बलता और शारीरिक क्षीणता में अभ्रक भस्म रामबाण की तरह काम करती है। यह शरीर की सभी सात धातुओं को पोषण देती है और व्यक्ति को शीघ्र ही स्वस्थ बनाती है।
पाचन में (Abhrak Bhasma for digestion)
अभ्रक भस्म पाचन अग्नि को तेज करती है और पाचन क्रिया को सुधारती है। यह भोजन के पोषक तत्वों को शरीर में अच्छे से अवशोषित करने में मदद करती है। अपच और मंदाग्नि में यह लाभकारी है।
यकृत रोग में (Abhrak Bhasma for liver diseases)
लीवर या यकृत के रोगों में अभ्रक भस्म उपयोगी है। यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाती है और लीवर को मजबूत बनाती है। पीलिया और अन्य यकृत विकारों में यह सहायक होती है।
प्लीहा रोग में (Abhrak Bhasma for spleen disorders)
तिल्ली या प्लीहा के बढ़ने और अन्य विकारों में अभ्रक भस्म का सेवन लाभदायक है। यह प्लीहा के आकार को नियंत्रित करती है और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाती है।
त्वचा रोग में (Abhrak Bhasma for skin diseases)
अभ्रक भस्म त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाती है। यह रक्त शुद्धि के माध्यम से त्वचा रोगों में लाभ पहुंचाती है। मुंहासे, दाग-धब्बे और अन्य त्वचा समस्याओं में यह उपयोगी है।
बुद्धि वर्धक में (Abhrak Bhasma for intelligence)
अभ्रक भस्म मेधा वर्धक है यानी यह बुद्धि और स्मरण शक्ति को बढ़ाती है। यह मस्तिष्क को पोषण देती है और मानसिक क्षमताओं में वृद्धि करती है। याददाश्त की कमजोरी और एकाग्रता की कमी में यह लाभकारी है।
दीर्घायु में (Abhrak Bhasma for longevity)
अभ्रक भस्म को आयुर्वेद में रसायन औषधि माना गया है जो दीर्घायु प्रदान करती है। इसके नियमित सेवन से शरीर की सभी धातुएं पुष्ट होती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और व्यक्ति स्वस्थ एवं दीर्घजीवी होता है।
मोटापा में (Abhrak Bhasma for obesity)
अभ्रक भस्म मेटाबोलिज्म को सुधारती है और वजन को नियंत्रित करने में सहायक होती है। यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करती है।
जोड़ों के दर्द में (Abhrak Bhasma for joint pain)
गठिया, जोड़ों का दर्द और अन्य वात रोगों में अभ्रक भस्म लाभकारी है। यह जोड़ों की सूजन को कम करती है और हड्डियों को मजबूती प्रदान करती है। घुटनों के दर्द और कमर दर्द में भी यह उपयोगी है।
अभ्रक भस्म निर्माण विधि (Preparation method)
अभ्रक भस्म का निर्माण एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसे केवल अनुभवी आयुर्वेदिक विशेषज्ञों द्वारा ही तैयार किया जाना चाहिए।
मुख्य चरण:
- शोधन (Purification) – अभ्रक को गाय के मूत्र, नींबू के रस आदि में भिगोकर शुद्ध किया जाता है।
- मारण (Incineration) – शुद्ध अभ्रक को विभिन्न औषधीय रसों में पीसकर और भस्म बनाने की प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
- पुटन (Heating) – इसे विशेष भट्टियों में 100, 500 या 1000 बार तक गर्म किया जाता है। पुटन की संख्या के आधार पर अभ्रक भस्म के तीन प्रकार होते हैं:
- शतपुटी अभ्रक भस्म (100 बार)
- पंचसतपुटी अभ्रक भस्म (500 बार)
- सहस्रपुटी अभ्रक भस्म (1000 बार)
सहस्रपुटी अभ्रक भस्म सबसे उत्तम मानी जाती है।
सेवन मात्रा (Dosages of Abhrak Bhasma)
वयस्कों के लिए:
- सामान्य मात्रा: 125-250 मिलीग्राम
- विशेष परिस्थितियों में: 500 मिलीग्राम तक
- दिन में दो बार (सुबह और शाम)
- भोजन के बाद या आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशानुसार
बच्चों के लिए (5-12 वर्ष):
- मात्रा: 30-60 मिलीग्राम
- दिन में एक या दो बार
- केवल चिकित्सक की देखरेख में
नोट: अभ्रक भस्म एक शक्तिशाली औषधि है और इसकी सटीक मात्रा रोग की प्रकृति और रोगी की स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए इसका सेवन हमेशा योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
अनुपान (Adjuvants)
अभ्रक भस्म को विभिन्न अनुपानों के साथ लिया जाता है, जो रोग के अनुसार बदलते हैं:
- श्वास रोग में: शहद के साथ
- खांसी में: अदरक के रस या शहद के साथ
- हृदय रोग में: अर्जुन की छाल के क्वाथ के साथ
- मधुमेह में: शिलाजीत या त्रिफला के साथ
- कमजोरी में: दूध या घी के साथ
- बुखार में: शहद या गुलाब जल के साथ
- प्रमेह में: मिश्री और दूध के साथ
- क्षय रोग में: च्यवनप्राश के साथ
- सामान्य उपयोग: गुनगुने पानी या शहद के साथ
सावधानियां (Precautions of Abhrak Bhasma)
अभ्रक भस्म एक खनिज औषधि है, इसलिए इसके सेवन में विशेष सावधानी रखनी चाहिए:
- गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन केवल चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
- स्तनपान कराने वाली माताओं को सावधानीपूर्वक लेना चाहिए।
- हमेशा शुद्ध और प्रमाणित अभ्रक भस्म ही लें। अशुद्ध भस्म हानिकारक हो सकती है।
- बताई गई मात्रा से अधिक सेवन बिल्कुल न करें।
- बच्चों को यह औषधि केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही दें।
- यदि किसी घटक से एलर्जी हो तो इसका सेवन न करें।
- अभ्रक भस्म को हमेशा ठंडी, सूखी और हवा बंद जगह पर रखें।
- इसे सीधी धूप और नमी से बचाकर रखें।
- केवल विश्वसनीय आयुर्वेदिक कंपनियों से ही अभ्रक भस्म खरीदें।
- इसका सेवन करते समय तीखा, खट्टा और अधिक नमक वाला भोजन कम करें।
- किसी भी एलोपैथिक दवा के साथ लेने से पहले चिकित्सक से परामर्श करें।
- यदि सेवन के बाद कोई दुष्प्रभाव महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
- दीर्घकालिक उपयोग केवल चिकित्सक की निगरानी में करें।
- गुर्दे या लीवर की गंभीर बीमारी होने पर सावधानी से लें।
- इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
- अभ्रक भस्म को अन्य खनिज भस्मों के साथ मिलाकर लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
महत्वपूर्ण सूचना:
अभ्रक भस्म एक अत्यंत शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। इसका निर्माण जटिल प्रक्रिया से होता है और इसका सेवन बिना योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के नहीं करना चाहिए। केवल शुद्ध और प्रमाणित अभ्रक भस्म ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। अशुद्ध या गलत तरीके से बनाई गई भस्म स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी औषधि का स्व-चिकित्सा न करें। हमेशा पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर ही अभ्रक भस्म का सेवन करें।
संदर्भ ग्रंथ:
- रस रत्न समुच्चय
- रसेन्द्र सार संग्रह
- भैषज्य रत्नावली
- आयुर्वेद सार संग्रह
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